BRICK WORK
(Materials Required)
Brick Work (ईंट की दीवार बनाने) के लिए कुछ ज़रूरी सामग्री और टूल्स होते हैं। ईंट से संबंधित कुछ सामान्य उपकरण ईंटें, गारा (सीमेंट, रेत और पानी का मिश्रण), करनी, हथौड़ा, जॉइंटर, साहुल (दीवार को सीधा रखने के लिए), फावड़ा, और वाटर लेवल हैं। हथौड़ा ईंटों को तोड़ने और व्यवस्थित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जॉइंटर मोर्टार के जोड़ बनाने के लिए उपयोग किया जाता है, साहुल दीवार की सीधाई जाँचता है, फावड़ा सामग्री मिक्स करने के लिए और वाटर लेवल ऊंचाई मापने के लिए काम आता है।
Brick Work करने के लिए जरूरी सामग्री
Bricks (ईंटें)
जोड़ने (चिनाई) के लिए ईंट बनाने की प्रक्रिया में मिट्टी खोदना, उसे तैयार करना, उसे आकार देना सुखाना और फिर भट्ठे में पकाना शामिल है। अंतिम चरण में पकी हुई ईंटों को ठंडा करना। उसके बाद जोड़ाई करने के लिए तैयार होता है तथा इसे जोड़ने से पहले ईटे को अच्छी तरह से पानी मे भिंगो ले ताकि जोड़ाई के होने के बाद मजबूती के साथ सेट हो जाए।
Cement (सीमेंट)
ईंट की जोड़ाई के लिए पोर्टलैंड पॉज़ोलाना सीमेंट (PPC) सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि यह कम गर्मी पैदा करता है, जिससे दरारें कम पड़ती हैं, और इसमें जलयोजन ऊष्मा की दर धीमी होती है, जो सामान्य निर्माण कार्यों जैसे चिनाई और प्लास्टरिंग के लिए उपयुक्त सही माना गया है।

Sand (रेत)
ईंट जोड़ने के लिए बिल्डर रेत का उपयोग किया जाना चाहिए, जो कि एक मध्यम या मोटे दाने वाली, बिना मिट्टी और बिना पत्थर के साफ रेत होती है। यह रेत गारा (मोर्टार) को अच्छी मजबूती देती है, जिससे ईंटों को जोड़ना आसान हो जाता है। अच्छी गुणवत्ता वाली रेत गारे को अच्छी मजबूती प्रदान करती है। यह गारे को फैलाने और ईंटों पर लगाने में आसान बनाती है। साफ और सही रेत के मिश्रण से बना गारा लंबे समय तक टिकता है।
Water (पानी)
रेत और सीमेंट मिलाने के लिए, सबसे पहले उचित मात्रा में सूखी सामग्री को अच्छी तरह मिलाएं, मिश्रण के बीच में एक छोटा गड्ढा बनाकर उसमें पानी डालना चाहिए। फिर धीरे-धीरे पानी मिलाकर एक चिकना और मिश्रण करे। सामग्री के अनुसार की मात्रा के आधार पर अलग-अलग हो सकती है यदि मिश्रण बहुत गाढ़ा है, तो और पानी डालें। यदि बहुत पतला है, तो और सूखी सामग्री मिलाएं।
औजार / टूल्स (Tools)
1. Mason’s Line (लाइन डोरी) – ईंटों को सीधा और लाइन में लगाने के लिए
2. Line Pins (लाइन कील) – Mason’s line को पकड़ने के लिए
3. Spirit Level (लेवल मशीन) – दीवार का लेवल और सीधाई चेक करने के लिए
4. Plumb Bob (लोंघड़ी / सुतली) – वर्टिकल लाइन चेक करने के लिए
5. Hammer (हथौड़ा) – ईंट तोड़ने या सेट करने के लिए
6. Measuring Tape (फीता) – दूरी और आकार नापने के लिए
7. Bucket / Pan / Ghamela – Mortar मिक्स करने और उठाने के लिए
8. Spade / Hoe (कुदाल / बेलचा) – Mortar मिक्स करने के लिए
9. Brush – एक्स्ट्रा मोर्टार साफ करने या पानी देने के लिए
हथौड़ा
इसका इस्तेमाल ईंटों, पत्थरों या चिनाई को काटने, साफ़ करने और जमाने के लिए किया जा सकता है।
इस प्रकार के हथौड़े का उपयोग मुख्यतः ईंट और अन्य चिनाई सामग्री को काटने और आकार देने के लिए किया जाता है। छेनी का ब्लेड चीरने के लिए और सपाट भाग का उपयोग ठोकने के लिए किया जाता है।
फावड़ा (Shovel)
फावड़ा मुख्य रूप से मिट्टी, रेत, बजरी, कोयला, बर्फ और अन्य ढीली सामग्री को खोदने, उठाने और एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाला एक हाथ से चलने वाला औजार है। यह कृषि, बागवानी मे भी इस्तेमाल होता है, और विभिन्न क्षेत्रों में उपकरण के रूप में उपयोग होता है। और गड्ढे बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।
करनी
जोड़ाई करने में कन्नी (ट्रोवेल) इसका मुख्य काम ईंटों के बीच के जोड़ों में गारा (सीमेंट का मसाला) भरने और उसे फैलाने के लिए किया जाता है। यह एक हाथ का औज़ार है जिसका इस्तेमाल यह ईंटों और प्लास्टर की सतह को चिकना करने और उसे सही आकार देने में मदद करता है। यह चिनाई का काम करते समय किया जाता है, जिससे ईंटों के बीच सही से मसाला भर सके और दीवार मजबूत बन सके।
साहुल (Plumb Bob)
साहुल (Plumb Bob) का काम किसी चीज़ की ऊर्ध्वाधर (सीधी) रेखा का पता लगाना है, खासकर निर्माण कार्य में दीवारों की सीधाई या झुकाव जाँचने के लिए. इसमें एक नुकीला धात्विक भार होता है जो एक डोरी से लटका होता है; डोरी की दिशा गुरुत्वाकर्षण के कारण हमेशा सीधी, उर्ध्वाधर होती है, जिससे उपयोगकर्ता किसी भी वस्तु की सीधी या टेढ़ी-मेढ़ी स्थिति को आसानी से मापा जा सकता है
जॉइंटर
ईट के जॉइन्ट में, ईटों को आपस में जोड़ने के लिए गारे (मोर्टार) का उपयोग किया जाता है, जो सीमेंट, रेत, और पानी का मिश्रण होता है, या मिट्टी के मिश्रण का भी इस्तेमाल किया जाता है, खासकर ग्रामीण और पारंपरिक इमारतों में। इस गारे की परत ईटों के बीच भरी जाती है, जिससे दीवारों को मजबूती मिलती है, और फिर इन गारे के जोड़ों को अलग-अलग तरीकों से फिनिश किया जाता है, ईट के जॉइन्ट को ठीक से भरा जाना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे ईंटों की मजबूती बढ़ती है। सही तरीके से भरे गए और ठीक से फिनिश किए गए जॉइंट्स दीवार को अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाते हैं।
लाभ: इससे जोड़ सफाई से बनते हैं और पानी अंदर नहीं जा पाता, जिससे दीवार की मज़बूती बनी रहती है।
वाटर लेवल
ईंट की जोड़ाई के लिए वाटर लेवल मापने के लिए एक पारदर्शी प्लास्टिक (ट्यूब) कहते हैं, का इस्तेमाल किया जाता है, जो पानी के सिद्धांत पर काम करती है कि पानी अपना लेवल स्वयं ढूँढता है. वाटर लेवल मापने के लिए, ट्यूब को पानी से भरें, फिर ट्यूब के दोनों सिरों को उस ऊंचाई पर लाएं जहाँ आपको ईंट की जोड़ाई के लिए लेवल की आवश्यकता है. पानी का लेवल दोनों सिरों पर समान होगा, जिससे आपको सही लेवल मिल जाएगा।
RCC कार्य
आर.सी.सी. (RCC) का काम पूरा होने के बाद तुरंत ईंटों की जोड़ाई (दीवार निर्माण) नहीं करनी चाहिए, बल्कि कम से कम 18 से 20 दिनों का इंतजार करना चाहिए। ताकि कंक्रीट को पूरी तरह से मजबूती मिल सके। ताकि उस पर पड़ने वाले भार को सह सके। आर.सी.सी. के पर्याप्त मजबूत हो जाने के बाद ही आप ईंटों का काम (जोड़ाई) शुरू कर सकते हैं।
अन्य जरूरी बातें:
1. ईंटों को भिगोकर लगाना चाहिए ताकि वो गारे का पानी न चूसें।
2. ईटे लगभग 10mm रखना चाहिए।
3. ईट जोड़ाई के बाद (पानी देना) जरूरी है, कम से कम 7 दिन तक।
जोड़ाई करने की विधि
ईट की जोड़ाई करने से पहले सुनिश्चित करें कि RCC नींव पूरी तरह से मजबूत हो गया है। इसके बाद ईट की जोड़ाई करने से पहले ईंटों को पानी में भीगा लेना चाहिए। फिर एक मजबूत नीव पर गारा (सीमेंट और रेत का मिश्रण) बिछाकर पहली ईट रखे। इसके बाद प्रत्येक ईट को दबाते हुए और अतिरिक्त गारे को हटाते हुए दीवार बनाए। ध्यान देना है। जब जोड़ाई करते समय हर ईट के स्तर (लेवल) और लंबवत (साहुल) की जाँच करते रहना चाहिए।
ईंट की जोड़ाई होने के बाद सबसे महत्वपूर्ण काम है उसकी तराई करना जिससे दीवार को मजबूती मिलती है गर्मी के मौसम में दिन में 3-5 बार और सर्दियों में 3 बार पानी डालें। सीमेंट के मसाले से बनी दीवार पर कम से कम 7 दिन और गर्मियों में 10 से 15 दिन तक दिन में कई बार पानी डालना चाहिए। अगर तराई ठीक से न की जाए, तो मसाला कमजोर हो सकता है और दीवार में दरारें पड़ सकती हैं।
दीवार के मजबूत होने के बाद, अगला कदम आप दीवारों पर लगे अतिरिक्त गारे को हटाने के लिए एक मुलायम ब्रश का उपयोग करें। किसी भी दरार या कमजोर जगह की जांच करें और उन्हें अतिरिक्त गारे से भरें। दीवार को अच्छी तरह से धोकर किसी भी गंदगी या फफूंदी को हटा दें, खासकर यदि आप सीलर या वॉटरप्रूफिंग लगाने वाले हैं।इसके बाद दीवार मे प्लास्टर करने से पहले पूरी तरह दीवाल सूखने के बाद ही प्लास्टर कर सकते हैं।


